FeedCluster.com - Free Community Aggregators, Blog Aggregator Hosting Create Aggregator | Submit Blog | Log In
हिन्दी ब्लॉग संग्रह
शाम के धुंधलके
शाम के धुधलके में इक तस्वीर नज़र आई छू कर देखा तो यादो की जागीर नज़र  आई [read more]
0 CommentsView blog reactions
"खुली आँख की मौत"
जब दिन भर की मेहनत से हो कुछ बूँद पसीने की ढल्की... जब चूल्हों मे सर्दी सी हो, और आँखों में बारिश हल्की... [read more]
5 CommentsView blog reactions
राजनीतिक नफा-नुकसान के लिए ...
राजनीतिक नफा-नुकसान के लिए पाठ्यक्रमों का विरोध [read more]
0 CommentsView blog reactions
उग आयेंगे कागज़ पर आईने कुछ नज़्म के
कुछ फूलों की महक  से , क्या मिलेगा आपको रूह  को  महकाइए   ,जहां मिलेगा आपको [read more]
0 CommentsView blog reactions
लेखक संगठनों पर ओम थानवी
ओम थानवी ने जनसत्ता के 29 अप्रैल 2012 कें अंक में लेखक संगठनों पर आरोप लगाया कि वे लेखकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाते हैं, और लेखकों को ऐसे संगठन बनाने के लिए 'कसूरवार' ठहराया। उनके झूठे आरोपों का जवाब देते हुए मैंने जो लेख जनसत्ता को ... [read more]
0 CommentsView blog reactions
न रकीब है कोई न हि दुश्मनी बेवजह
न  रकीब  है  कोई  न  हि  दुश्मनी  बेवजह  क्यूँ  किसी  बद  ख्याली  में  रहे   आदमी  बेवजह  [read more]
5 CommentsView blog reactions
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे (लघु कथा)
शेखर जंक्शन पर दामिनी के आने का इंतजार रात के ग्यारह बज़े से ही कर रहा था , जैसे जैसे रात गहराती गयी स्टेशन  की दुकाने बंद होती गयी और सन्नाटा पसरने लगा | रात के ठीक 1.30 बज़े इंटरसिटी  एक्सप्रेस अपने समय पर पहुँच  गयी , रात होने के कार ... [read more]
5 CommentsView blog reactions
Beti Bachao ,Rajni's Interview.FLV
6 CommentsView blog reactions
जरूरी है बराबरी के आधार वा ...
जरूरी है बराबरी के आधार वाली बुनियादी शिक्षा [read more]
0 CommentsView blog reactions
एक ग़ज़ल : सोचता हूं......
सोचता हूँ इस शहर में आदमी रहता किधर है ? [read more]
0 CommentsView blog reactions
क्या यही प्रेम परिभाषा है ?
तुझसे लिपट  के........... तुझी में सिमट जाऊं  भुला  के खुद को.......... तुझपे हीं मिट जाऊं  ये कैसी तेरी चाहत ? ये कैसा है प्यार सखे ? मिट जाए पहचान भी नहीं मुझे स्वीकार सखे  [read more]
9 CommentsView blog reactions
मजदूर दिवस
आज मजदूर दिवस के अवसर पर विश्व के समस्त श्रम साधको को समर्पित एक छन्द- [read more]
0 CommentsView blog reactions
check it out , it's funny....
.....If You Love SomeoneTHE ORIGINAL QUOTEIf you love someone,Set her free...If she comes back, she's yours,If she doesn't, she never was....THE NEW VERSIONS R.....Pessimist:If you love someone,Set... [read more]
View blog reactions
उनका ख़त ….मेरी ज़ुबानी !
इस  जलती  धुप  में  पल  में  सारा  आलम  गुलाबी  हो  गया …घर  में  कदम  रखते  ही  देखा .इक  गुलाबी  सा  ख़त  धुप  को  जला  रहा  था .! हाथ  छुते   ही .लपक  के  दिल  से  लग   गया ..पहचान  लिया  किधर   से  आया  है   ये ! वही  नदी  सी  बल  ख ... [read more]
11 CommentsView blog reactions
FW: apparent contradiction
Dear Friends, [read more]
View blog reactions
तो क्या बुरा होगा...
मैं रोऊँ तो खुदा हँसता रहे, तो क्या बुरा होगा... ये कारोबार यूँ चलता रहे, तो क्या बुरा होगा... [read more]
18 CommentsView blog reactions
मेरा ही  राज़दार  मुझको आज ...
मेरा ही  राज़दार  मुझको आज छोड़ गया आज मेरा भी भरोसा   कहूँ तो तोड़ गया    [read more]
0 CommentsView blog reactions
क्या मन नहीं होता औरत का ...
क्या मन नहीं होता औरत का केवल जिश्म ही भाता है तुम्हें अनेक बार कहा है मैंने तुमसे मुझे सोते से मत जगाया करो लेकिन तुम आते हो रात गए पीकर   गन्दी बदबू भरी शराब तब तुम्हारा प्यार जाग पड़ता है अचानक या ये तुम्हारी हवस  है  जो ले आ ... [read more]
0 CommentsView blog reactions
hindihindi.in.divyanarmada: दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ --संजीव 'सलिल'
hindihindi.in.divyanarmada: दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ --संजीव 'सलिल': दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ संजीव 'सलिल' * शब्दों से खिलवाड़ का, लाइलाज है रोग.. कहें 'स्टेशन' आ गया, आते-जाते लोग. * 'पौधा... [read more]
0 CommentsView blog reactions
आखिर कब तक ?
हमारे देश में हमेशा से असमानता को हटाये जाने का प्रयास होता रहा है लेकिन यह 'असमानता' जाने कबतक हमारे देश के अस्तित्व से चिपकी रहेगी ? कब तक भेद भाव का सामना करना पड़ेगा समाज के विभिन्न वर्गों को ? कभी जातियता , कहीं लिंग तो कभी अमीरी औ ... [read more]
0 CommentsView blog reactions
लिखना बाकी है
शब्दों के नर्तन से शापित अंतर्मन शिथिलाया लिखने को तो बहुत लिखा पर कुछ लिखना बाकी है [read more]
5 CommentsView blog reactions
दोहे-दर्शन (भाग-२)
इस साल की यह पहली प्रस्तुति “दोहे-दर्शन” (भाग-२) खास आपके जानिब.......... [read more]
0 CommentsView blog reactions
एक ग़ज़ल : पागलों सी बात करता है...
पागलों सी बात करता है [read more]
6 CommentsView blog reactions
लोग हमसे बिदकने लगे हैं
                   बहुत दिनों से मेरे अंतरजाल में फोंट की समस्या उत्पन्न होने या  यूँ कहें कि   नेटवर्किंग के बारे में अपने  अल्प ज्ञान  के कारण एक भी पोस्ट नहीं लिख पाया. पोस्ट के बदले "रचना"  अरे अरे अरे ... भाषा विज्ञान अथवा साहित्य ... [read more]
0 CommentsView blog reactions
मेरा वो इक ख़त
समेट के भेज रही हूँ  सुबह सुबह की बारिश  मेरे इक ख़त में  कुछ बूदें ...कुछ लड़ियाँ पानीयों से सनी महकती मिटटी की खुशबू ....कुछ हवाओं का सीलापन इक सार गिरती बूंदों  से बनी गले की माला  और रिमझिम -2 करती कानों में अटकी बूंदों की बालि ... [read more]
6 CommentsView blog reactions
मैं जो हूँ
-भवानी प्रसाद मिश्र वस्तुतः मैं जो हूँ मुझे वहीं रहना चाहिए यानी वन का वृक्ष खेत की मेड़ नदी की लहर दूर का गीत व्यतीत वर्तमान में उपस्थित भविष्य में मैं जो हूँ मुझे वहीं रहना चाहिए तेज गर्मी मूसलाधार वर्षा कड़ाके की सर्दी ... [read more]
0 CommentsView blog reactions
होली का त्यौहार, पौराणिक कथा, धार्मिक, पारंपरिक व वैज्ञानिक कारण
             होलिका दहन पर्व के कई मत, मतांतर हैं। इसे मुख्य रूप से हिरण्य कश्यप की बहन होलिका के दहन का दिन माना जाता है, वहीं शास्त्रों में कई तरह के मत दिए गए हैं। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन होलाष्टक के बाद होलिका दहन ... [read more]
3 CommentsView blog reactions
दिल अभी भी मिले नहीं हैं.
कह दो दिल से कैसे मानू [read more]
5 CommentsView blog reactions
शुभकामनायें
शुभकामनायें [read more]
5 CommentsView blog reactions
उधारी बंद
इच्छा – उठो, उठो। क्या सरकार की तरह हर समय सोते रहते हो। कभी तो कुछ काम भी कर लिया करो। विकास – उठ गया भाग्यवान। सो नहीं सोच रहा था, विश्वास रखो। इच्छा – एक बार विश्वास किया तो अभी तक भुगत रही हूं, वैसे किसी ने सही ही कहा है, विश्वास ... [read more]
1 CommentView blog reactions
 
Join us On Facebook

Host
Free Domain Name - www.YOU.co.nr!